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Working Holiday पर निकलने से पहले, वहाँ रहते हुए, और लौटते वक़्त जो सवाल हर किसी के मन में आते हैं — उनके सीधे जवाब, बिना जार्गन। उस दोस्त की तरह, जो यह सब करके लौट चुका है।
भारतीय पासपोर्ट के लिए, हमारे डेटा के मुताबिक़ दोनों खुले गंतव्य — ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रिया — 18 से 30 साल (30 शामिल) तक आवेदन लेते हैं। उम्र आम तौर पर आवेदन के समय देखी जाती है, रवानगी की तारीख़ पर नहीं। ऐप में हर गंतव्य आपके पासपोर्ट के हिसाब से सटीक सीमा दिखाता है।
हमारे डेटा के मुताबिक़ फ़िलहाल दो: ऑस्ट्रेलिया (Work and Holiday वीज़ा, सबक्लास 462) और ऑस्ट्रिया (Working Holiday प्रोग्राम)। दोनों की शर्तें काफ़ी अलग हैं — ऑस्ट्रेलिया में बैलट और सालाना कोटा है, ऑस्ट्रिया में सीधा आवेदन। ऐसे समझौते दो देशों के बीच होते हैं और समय के साथ बदल सकते हैं। PVTKit हर गंतव्य की शर्तें स्ट्रक्चर्ड डेटा के साथ ऑफ़लाइन दिखाता है।
हमारे डेटा के मुताबिक़: ऑस्ट्रिया के लिए €195, ऑस्ट्रेलिया के लिए 840 AUD — और ऑस्ट्रेलिया के बैलट में नाम डालने की 25 AUD रजिस्ट्रेशन फ़ीस अलग से। वीज़ा तो बजट का एक हिस्सा भर है: बीमा, टिकट और प्रूफ़ ऑफ़ फ़ंड्स भी जोड़िए। ऐप का बिल्ट-इन कन्वर्टर सब कुछ रुपये में देखने में मदद करता है।
वह न्यूनतम रक़म जो आपको दिखानी होती है ताकि साबित हो सके कि शुरुआती हफ़्ते बिना काम किए भी आपका ख़र्च चल जाएगा। हमारे डेटा के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया के लिए 5,000 AUD; ऑस्ट्रिया भी फ़ंड्स का सबूत माँगता है, हालाँकि कोई तयशुदा रक़म हमारे डेटा में दर्ज नहीं है। आम तौर पर आपके नाम का ताज़ा बैंक स्टेटमेंट काफ़ी होता है।
आधिकारिक न्यूनतम, हमारे डेटा के मुताबिक़: 5,000 AUD का प्रूफ़ ऑफ़ फ़ंड्स, 840 AUD वीज़ा फ़ीस और पूरे प्रवास को कवर करता बीमा। असल ज़िंदगी में इससे ज़्यादा रखिए: किराये की डिपॉज़िट और पहला किराया, आना-जाना, और नौकरी मिलने तक का ख़र्च। न्यूनतम से ऊपर मार्जिन लेकर चलेंगे तो मजबूरी में कोई भी काम नहीं पकड़ना पड़ेगा।
जैसे ही प्लान थोड़ा पक्का हो: ऑस्ट्रेलिया में पहले बैलट में नाम आना ज़रूरी है और भारतीय पासपोर्ट का सालाना कोटा सीमित है। प्रोसेसिंग का समय भी जोड़िए — हमारे डेटा के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया में 5 से 11 हफ़्ते, ऑस्ट्रिया में 2 से 8 हफ़्ते। ऊपर से बीमा, फ़ंड्स और दस्तावेज़ जुटाने का वक़्त। कई महीने पहले से तैयारी का मतलब है: तारीख़ें आपकी मर्ज़ी की।
हर साल एक देश किसी नागरिकता के लोगों को जितने वीज़ा देता है, वही कोटा है। हमारे डेटा के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया भारतीय पासपोर्ट के लिए साल में 1,000 जगहें रखता है; ऑस्ट्रिया के लिए हमारे डेटा में कोई सार्वजनिक कोटा दर्ज नहीं है। कोटा भर जाए तो अगले सीज़न का इंतज़ार — इसीलिए जल्दी आवेदन करना फ़ायदे में रखता है।
भारतीय पासपोर्ट के लिए ऑस्ट्रेलिया का पहला क़दम वीज़ा आवेदन नहीं, बैलट है: हमारे डेटा के मुताबिक़ 25 AUD की रजिस्ट्रेशन फ़ीस देकर आप ड्रॉ में नाम डालते हैं, और न्योता मिलने पर ही 840 AUD वाला असली आवेदन कर पाते हैं। पहचान के लिए PAN कार्ड माँगा जाता है, और पहला वीज़ा ऑस्ट्रेलिया से बाहर रहते हुए ही माँगा जाता है। ड्रॉ की खिड़कियाँ छोटी होती हैं, इसलिए तारीख़ों पर नज़र रखिए।
ऑस्ट्रेलिया के लिए हाँ: हमारे डेटा के मुताबिक़ कोई उच्च-शिक्षा योग्यता या कम-से-कम 2 साल की अंडरग्रेजुएट पढ़ाई चाहिए, साथ में कामचलाऊ (functional) अंग्रेज़ी। ऑस्ट्रिया के लिए हमारे डेटा में ऐसी कोई डिग्री या भाषा-शर्त दर्ज नहीं है। आवेदन से पहले मार्कशीट और सर्टिफ़िकेट स्कैन करके सँभाल लीजिए — ऐप का वॉलेट उन्हें ऑफ़लाइन रखता है।
आम नियम: हर देश में एक ही बार। ऑस्ट्रिया साफ़ कहता है कि जो पहले उसका Working Holiday कर चुके हैं, वे दोबारा नहीं कर सकते। ऑस्ट्रेलिया उल्टा उदार है — हमारे डेटा के मुताबिक़ शर्तें पूरी करने पर दूसरा और तीसरा साल तक मुमकिन है। बस हर आवेदन के समय उम्र-सीमा के भीतर रहना ज़रूरी है।
Working Holiday आज़ादी देता है: जिसके लिए चाहें काम कीजिए, घूमिए, बिना किसी को जवाब दिए शहर बदलिए। मक़सद डिग्री या लंबी पढ़ाई है तो स्टूडेंट वीज़ा ही रास्ता है — ज़्यादातर Working Holiday पढ़ाई सीमित रखते हैं, हमारे डेटा के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया में ज़्यादा-से-ज़्यादा 4 महीने। और अगर इरादा देश को काम करते हुए जीने का है, तो Working Holiday इसी के लिए बना है।
ऑस्ट्रिया माँगता है कि या तो वापसी का टिकट हो या उसे ख़रीदने लायक़ फ़ंड्स — और यह चीज़ पहुँचने पर भी जाँची जा सकती है, इसलिए सबूत हाथ में रखिए। ऐप का वॉलेट टिकट और सर्टिफ़िकेट ऑफ़लाइन सँभालता है — एयरपोर्ट पर नेटवर्क न भी मिले, तो भी।
ज़्यादातर मामलों में हाँ, और अक्सर पूरे प्रवास के लिए। हमारे डेटा के मुताबिक़ ऑस्ट्रिया कम-से-कम €30,000 कवरेज वाला हेल्थ इंश्योरेंस माँगता है; ऑस्ट्रेलिया में भी बिना ढंग के कवर के जाना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी है — इलाज वहाँ सस्ता नहीं। पॉलिसी लेने से पहले अपने गंतव्य की सटीक शर्तें देखिए, और सर्टिफ़िकेट यात्रा-दस्तावेज़ों के साथ रखिए।
कपल: हाँ, मगर हर एक का अपना अलग आवेदन — कोई साझा वीज़ा नहीं होता, और कोटा वाले देशों में दोनों के नतीजे एक साथ आएँ, इसकी कोई गारंटी नहीं। बच्चों के साथ मुश्किल है: हमारे डेटा के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया और ऑस्ट्रिया दोनों बिना आश्रितों (dependents) के आने की शर्त रखते हैं। प्लान बनाने से पहले यह ज़रूर जाँच लीजिए।
अपने सारे कॉन्ट्रैक्ट का चक्कर लगाइए: मोबाइल और इंटरनेट प्लान, जिम, स्ट्रीमिंग सब्सक्रिप्शन, किराये के घर का नोटिस, गाड़ी से जुड़े बीमे। और अगर पीछे से कोई आपके काग़ज़ी काम सँभालेगा, तो पावर ऑफ़ अटॉर्नी भी सोच लीजिए। ऐप की डिपार्चर चेकलिस्ट ये सारे क़दम सही क्रम में टिक करवाती है, ताकि कुछ छूटे नहीं।
हाँ — यही तो इस वीज़ा की आत्मा है: यह किसी एक एम्प्लॉयर से बंधा नहीं होता। हाँ, कुछ देश एक ही एम्प्लॉयर के साथ काम की अवधि सीमित रखते हैं — हमारे डेटा के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया में एक एम्प्लॉयर के पास ज़्यादा-से-ज़्यादा 6 महीने। उसके बाद बस नई जगह काम पकड़ लीजिए।
सीमित रूप में हाँ: हमारे डेटा के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया में ज़्यादा-से-ज़्यादा 4 महीने की पढ़ाई चलती है। कुछ महीनों का लैंग्वेज कोर्स आम तौर पर आराम से हो जाता है, लेकिन डिग्री या लंबे कोर्स के लिए स्टूडेंट वीज़ा ही सही दरवाज़ा है।
ज़्यादातर गंतव्यों में हाँ — वीज़ा की वैधता के दौरान कई बार आना-जाना चल जाता है। फिर भी अपवाद होते हैं और शर्तें वीज़ा-दर-वीज़ा बदलती हैं, इसलिए पड़ोसी देश की ट्रिप बुक करने से पहले अपने वीज़ा की एंट्री-शर्त ज़रूर देख लीजिए।
वही जाने-पहचाने: टैक्स नंबर, बैंक खाता, रहने की जगह, लोकल SIM। कुछ देशों में पते का सरकारी पंजीकरण भी करना होता है — पहुँचते ही अपने शहर के नियम देख लीजिए। ऐप की अराइवल चेकलिस्ट ये क़दम देश-दर-देश बताती है, पूरी तरह ऑफ़लाइन।
जल्दी अपॉइंटमेंट लीजिए: सैलरी पाने के लिए लोकल खाता अक्सर ज़रूरी होता है। आम तौर पर वीज़ा लगा पासपोर्ट चाहिए, कभी-कभी पते का सबूत और टैक्स नंबर भी — माँगें बैंक और देश के हिसाब से बदलती हैं। दस्तावेज़ ऐप के वॉलेट में स्कैन हों, तो अपॉइंटमेंट के दिन काग़ज़ ढूँढ़ते नहीं फिरना पड़ता।
पहले स्थानीय अधिकारियों के पास गुमशुदगी या चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराइए, फिर नज़दीकी भारतीय दूतावास या वाणिज्य दूतावास से बदले दस्तावेज़ के लिए संपर्क कीजिए। दस्तावेज़ों की कॉपियाँ हों तो काम कई गुना तेज़ हो जाता है। ऐप का वॉलेट ठीक इसी के लिए है: आपके स्कैन बिना नेटवर्क भी खुलते हैं।
हाँ: काम शुरू करते ही आप वहाँ के कामगारों की तरह टैक्स के दायरे में आते हैं, अक्सर सैलरी से सीधी कटौती के रूप में। हर पेस्लिप और सालाना समरी सँभालकर रखिए — वहाँ की टैक्स फ़ाइलिंग में काम आती हैं, और अक्सर देश छोड़ने के बाद ज़्यादा कटा टैक्स वापस पाने में भी।
आम तौर पर यह वीज़ा क़रीब 12 महीने का होता है और बढ़ता नहीं। ऑस्ट्रेलिया यहाँ अपवाद है: हमारे डेटा के मुताबिक़ तय सेक्टरों में 88 दिन का निर्धारित (specified) काम करने पर दूसरा साल — और आगे तीसरा भी — मुमकिन है। ऑस्ट्रिया में दूसरी बार का विकल्प नहीं है, तो वहाँ आगे की राह किसी और स्टेटस से ही निकलती है।
CV को लोकल फ़ॉर्मैट में ढालिए, उन सेक्टरों पर निशाना रखिए जहाँ Working Holiday वाले खूब लिए जाते हैं — हॉस्पिटैलिटी, खेती और सीज़नल काम, रिटेल, टूरिज़्म — और सीधे जाकर पूछने से मत हिचकिए: इन कामों में चलकर पूछना आज भी ख़ूब चलता है। बाक़ी काम नेटवर्क करता है: रूममेट, दूसरे ट्रैवलर, पुराने एम्प्लॉयर। ऐप का ऑफ़लाइन नक़्शा आस-पास की काम की जगहें दिखाता है।
जिस देश में काम किया, वहाँ टैक्स रिटर्न फ़ाइल करके — कई जगह यह देश छोड़ने के बाद भी हो जाता है, और साल का सिर्फ़ एक हिस्सा काम किया हो तो रिफ़ंड आम बात है। इसके लिए पेस्लिप और एम्प्लॉयर की सालाना समरी चाहिए। ऐप की रिटर्न चेकलिस्ट ये क़दम देश-दर-देश गिनाती है।
सीधे-सीधे नहीं — Working Holiday अपने आप में इमिग्रेशन का रास्ता नहीं है, इस पर साफ़ नज़र रखिए। हाँ, वहाँ की वर्क एक्सपीरियंस दूसरे रास्तों में वज़न रख सकती है — पॉइंट-बेस्ड वीज़ा, एम्प्लॉयर स्पॉन्सरशिप — हर देश के अपने नियमों के हिसाब से। कुछ भी अपने आप नहीं होता: पूरा प्लान उसी पर टिकाने से पहले सटीक शर्तें देख लीजिए।
जो जाते समय होल्ड पर किया था उसे फिर चालू करना, बैंक और KYC में पता-स्टेटस अपडेट करना, और टैक्स के लिहाज़ से अपनी रेज़िडेंसी की स्थिति समझकर विदेशी आमदनी के नियम देखना। यही वह हिस्सा है जिसे सब हल्के में लेते हैं। ऐप की रिटर्न चेकलिस्ट इसे ठोस क़दमों में बाँट देती है।
ज़रूरी नहीं: कुछ गंतव्यों में, स्थायी रूप से देश छोड़ने के बाद रिटायरमेंट फ़ंड में कटा पैसा — या उसका हिस्सा — वापस माँगा जा सकता है। इन सारे मामलों की एक ही साझा शर्त है: सबूत। कॉन्ट्रैक्ट, पेस्लिप और स्टेटमेंट सालों बाद तक सँभालकर रखिए।
इसे विदेश की प्रोफ़ेशनल एक्सपीरियंस की तरह लिखिए, घूमने का साल बताकर नहीं: कौन-से रोल, क्या ज़िम्मेदारियाँ, रोज़ किस भाषा में काम, कितनी आत्मनिर्भरता। जो गिना जा सके, गिनाइए — अवधि, टीम का साइज़, कितने कस्टमर। तथ्यों में कहानी कहेंगे, तो यह अनुभव सचमुच आपको अलग दिखाएगा।
हाँ — भारतीय पासपोर्ट के लिए फ़िलहाल विकल्प कम हैं, पर रास्ते हैं: हमारे डेटा के मुताबिक़ ऑस्ट्रेलिया में शर्तें पूरी करने पर दूसरा और तीसरा साल मिल सकता है, और ऑस्ट्रिया का एक बार वाला मौक़ा अलग से खुला रहता है (बशर्ते पहले न किया हो)। हर आवेदन के समय 18–30 की उम्र-सीमा लागू रहती है — तो प्लानिंग में उम्र का गणित पहले कर लीजिए।
बेझिझक कई साल: पेस्लिप, टैक्स दस्तावेज़, वर्क कॉन्ट्रैक्ट और रिहाइश के सबूत देर से की गई टैक्स फ़ाइलिंग, रिटायरमेंट क्लेम या भविष्य के किसी वीज़ा में फिर काम आते हैं। ऐप के वॉलेट में स्कैन होकर ये लौटने के बरसों बाद भी ऑफ़लाइन पढ़े जा सकते हैं।
ये सारे क़दम, सही क्रम में और ऑफ़लाइन टिक करने लायक़, ऐप में हैं — मुफ़्त, आपकी भाषा में।
ऐप डाउनलोड करें — मुफ़्त